विविध विधाओं की विपुला, पर विप्लुति युति विप्लावन है।
विप्रलम्भ से विप्रोषित विपुला, पर
विप्रचित्ति विप्लावक हैं।
माने बैठे विपुला को विपणी, विनिपाती जो थे
विनिपतित हुये।
विचिन्तन के जो हुये विचिन्तक, इस विपुला पर वे विजित हुये।
डॉ.अखिलेश
कुमार पाण्डेय