Thursday, 1 December 2016

प्रेम

मनुष्य के जीवन में कोई न कोई तो ऐसा होता ही है जिसे वह बहुत ज्यादा प्रेम करता है।

Thursday, 24 November 2016

रामचरित मानस

जैसे दुःख में ईश्वर का भजन किया जाता है वैसे सुख में भी करना चाहिए वगैर जीवन की आपाधापी में व्यस्त हुये। ईश्वर ने मनुष्य का तन दिया है तो इससे अवश्य ही परोपकार, दया, दान, धर्म आदि करते रहना चाहिए तथा यह सौभाग्य की बात समझकर कि मानव जीवन दुर्लभ है, इस महान पंक्ति को याद करते रहना चाहिए --
बड़े भाग्य मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा। श्री गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानस

विपन्नता

प्रायः धन का अभाव तथा विपन्नता ही ईश्वर की तरफ रुझान मोड़ती है।

नियति

मनुष्य अपनी नियति का स्वयं जिम्मेदार है ।

Tuesday, 22 November 2016

जुवां पर जब भी तुम मेरा नाम लाओगे।

जुवां पर जब भी तुम मेरा नाम लाओगे।
 सामने अपने तुम मेरा प्रतिमान पाओगे।
मेरे दिल के दरवाजे पर चाहे जब चले आना।
 उस पर एक ही नाम मोहब्बत, लिखा पाओगे।