मनुष्य के जीवन में कोई न कोई तो ऐसा होता ही है जिसे वह बहुत ज्यादा प्रेम करता है।
विचार एक ऐसा सम्प्रत्यय है जो हर व्यक्ति के जीवन का अंग होता है। और मस्तिष्क रूपी सागर में उन विचार मनकों का मंथन प्रतिपल चलता रहता है। यह ब्लाग मेरे विचार मंथन के परिणामों का आधार है।
Thursday, 1 December 2016
Thursday, 24 November 2016
रामचरित मानस
जैसे दुःख में ईश्वर का भजन किया जाता है वैसे सुख में भी करना चाहिए वगैर जीवन की आपाधापी में व्यस्त हुये। ईश्वर ने मनुष्य का तन दिया है तो इससे अवश्य ही परोपकार, दया, दान, धर्म आदि करते रहना चाहिए तथा यह सौभाग्य की बात समझकर कि मानव जीवन दुर्लभ है, इस महान पंक्ति को याद करते रहना चाहिए --
बड़े भाग्य मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा। श्री गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानस
Tuesday, 22 November 2016
जुवां पर जब भी तुम मेरा नाम लाओगे।
जुवां पर जब भी तुम मेरा नाम लाओगे।
सामने अपने तुम मेरा प्रतिमान पाओगे।
मेरे दिल के दरवाजे पर चाहे जब चले आना।
उस पर एक ही नाम मोहब्बत, लिखा पाओगे।
सामने अपने तुम मेरा प्रतिमान पाओगे।
मेरे दिल के दरवाजे पर चाहे जब चले आना।
उस पर एक ही नाम मोहब्बत, लिखा पाओगे।
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