Thursday, 24 November 2016

रामचरित मानस

जैसे दुःख में ईश्वर का भजन किया जाता है वैसे सुख में भी करना चाहिए वगैर जीवन की आपाधापी में व्यस्त हुये। ईश्वर ने मनुष्य का तन दिया है तो इससे अवश्य ही परोपकार, दया, दान, धर्म आदि करते रहना चाहिए तथा यह सौभाग्य की बात समझकर कि मानव जीवन दुर्लभ है, इस महान पंक्ति को याद करते रहना चाहिए --
बड़े भाग्य मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा। श्री गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानस

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